पोयरो के सामने अब दो संभावित स्पष्टीकरण (solutions) थे – एक कानूनी, जिसमें किसी बाहरी हत्यारे को दोषी ठहराया जाए, और दूसरा नैतिक, जिसमें इस सामूहिक न्याय को स्वीकार किया जाए। फिल्म और किताब के अंत में पोयरो वही रास्ता चुनते हैं जो न्याय की आत्मा को शांति देता है, भले ही वह कानून की किताबों के खिलाफ हो।
यहाँ "मर्डर ऑन द ओरिएंट एक्सप्रेस" (Murder on the Orient Express) पर हिंदी में एक पाठ प्रस्तुत है: murder on the orient express in hindi
सुबह होते-होते यात्रियों में हड़कंप मच जाता है – अमेरिकी यात्री मिस्टर रैचेट का शव उनके कम्पार्टमेंट में खंजर से गोदा हुआ मिलता है। हैरानी की बात यह है कि उसके शरीर पर करीब बारह घाव हैं, और केबिन का दरवाजा अंदर से बंद था। यानी, हत्या ऐसे लगती है जैसे किसी ने ‘बंद कमरे’ में असंभव हत्या की हो। और दूसरा नैतिक
पोयरो एक-एक कर सुराग जोड़ते हैं – एक जली हुई चिट्ठी, एक गिरा हुआ रूमाल, एक टूटी हुई घड़ी, और एक अजीब डिब्बा। अंत में जब सभी यात्रियों से पूछताछ पूरी हो जाती है, तो पोयरो के सामने एक चौंकाने वाला निष्कर्ष आता है: ट्रेन के हर यात्री का उस हत्या में कोई न कोई हाथ था। असल में, यह एक सुनियोजित सामूहिक हत्या थी, जहाँ हर यात्री किसी न किसी तरह आर्मस्ट्रांग परिवार से जुड़ा था और रैचेट से बदला लेना चाहता था। एक गिरा हुआ रूमाल