The Ten Commandments Movie In Hindi Link

इस डर से फिरौन ने आदेश दिया कि सभी नवजात इब्रानी बालकों को नील नदी में डुबो दिया जाए। एक इब्रानी माँ ने अपने बच्चे को बचाने के लिए उसे एक पत्थर के पिटारे में सजाकर नदी में बहा दिया। नदी की लहरें उस पिटारे को फिरौन की बहन, राजकुमारी बिथिया के महल के किनारे ले आईं। बिथिया ने बच्चे को देखा और उस पर दया आ गई। उसने उसे गोद ले लिया और नाम रखा—।

मूसा ने आकाश की ओर हाथ बढ़ाया। परमेश्वर ने एक प्रचंड पुरवाई हवा भेजी। रात भर हवा चली, और समुद्र का पानी दो हिस्सों में बँट गया। बीच में सूखा रास्ता बन गया। इब्रानी लोग दौड़ते हुए उस पार चले गए। जैसे ही आखिरी व्यक्ति किनारे पर पहुँचा, मूसा ने फिर हाथ बढ़ाया—समुद्र की लहरें लौटीं और पूरी मिस्री सेना को अपने में समा लिया।

फिरौन रामसेस ने मूसा को पहचाना और ताना मारा: "तू जो राजकुमार था, आज गड़रिया बनकर आया है? मैं तेरे किसी परमेश्वर को नहीं मानता।" the ten commandments movie in hindi

वह मिद्यान देश पहुँचा, जहाँ उसकी मुलाकात जेथ्रो नामक एक याजक से हुई। उसने जेथ्रो की बेटी सिप्पोरा से शादी कर ली और एक साधारण गड़रिए के रूप में रहने लगा। एक दिन वह अपनी भेड़-बकरियों को होरेब पर्वत पर ले गया। अचानक उसने देखा—एक झाड़ी आग से जल रही थी, लेकिन वह जलती नहीं थी। तभी आकाशवाणी हुई:

रामसेस ने अपने ही बेटे को खोया। रातों-रात उसने आदेश दिया: "जाओ! यहाँ से चले जाओ!" बालों वाली मक्खियाँ

मिस्र की धरती पर फिरौन रामसेस का शासन था। उसके राज्य में इब्रानी (यहूदी) लोग गुलाम थे। उन पर बोझ ढोने वाले ऊँटों से भी ज्यादा कठोर काम लिया जाता था। उसी समय एक भविष्यवाणी हुई थी—एक इब्रानी बालक मिस्र के सिंहासन को हिला देगा और अपने लोगों को मुक्त कराएगा।

इब्रानी लोग मिस्र से निकल पड़े। वे लाल सागर के किनारे पहुँचे, तभी पीछे से धूल उड़ती दिखी—रामसेस ने अपना फैसला बदल लिया था और अपनी पूरी सेना लेकर आ रहा था। इब्रानी घबरा गए: "मूसा, क्या मरने के लिए ही तू हमें ले आया?" इसलिए वे बच गए।

तब शुरू हुआ विनाश का दौर। मूसा ने अपनी लाठी उठाई—नील नदी का पानी लहू बन गया। मेंढक, जूँ, अंधकार, बालों वाली मक्खियाँ, पशुओं की मृत्यु और फोड़े—एक के बाद एक नौ विपत्तियाँ आईं। पर हर बार रामसेस का दिल पत्थर जैसा कठोर हो जाता। जब दसवीं विपत्ति आई—"प्रथमजात की मृत्यु"—तो उस रात मिस्र के हर घर में, फिरौन के महल से लेकर जेल तक, पहले बेटे की मौत हो गई। इब्रानियों ने अपने दरवाज़ों पर मेम्ने के लहू से चिह्न बना रखा था, इसलिए वे बच गए।

इस डर से फिरौन ने आदेश दिया कि सभी नवजात इब्रानी बालकों को नील नदी में डुबो दिया जाए। एक इब्रानी माँ ने अपने बच्चे को बचाने के लिए उसे एक पत्थर के पिटारे में सजाकर नदी में बहा दिया। नदी की लहरें उस पिटारे को फिरौन की बहन, राजकुमारी बिथिया के महल के किनारे ले आईं। बिथिया ने बच्चे को देखा और उस पर दया आ गई। उसने उसे गोद ले लिया और नाम रखा—।

मूसा ने आकाश की ओर हाथ बढ़ाया। परमेश्वर ने एक प्रचंड पुरवाई हवा भेजी। रात भर हवा चली, और समुद्र का पानी दो हिस्सों में बँट गया। बीच में सूखा रास्ता बन गया। इब्रानी लोग दौड़ते हुए उस पार चले गए। जैसे ही आखिरी व्यक्ति किनारे पर पहुँचा, मूसा ने फिर हाथ बढ़ाया—समुद्र की लहरें लौटीं और पूरी मिस्री सेना को अपने में समा लिया।

फिरौन रामसेस ने मूसा को पहचाना और ताना मारा: "तू जो राजकुमार था, आज गड़रिया बनकर आया है? मैं तेरे किसी परमेश्वर को नहीं मानता।"

वह मिद्यान देश पहुँचा, जहाँ उसकी मुलाकात जेथ्रो नामक एक याजक से हुई। उसने जेथ्रो की बेटी सिप्पोरा से शादी कर ली और एक साधारण गड़रिए के रूप में रहने लगा। एक दिन वह अपनी भेड़-बकरियों को होरेब पर्वत पर ले गया। अचानक उसने देखा—एक झाड़ी आग से जल रही थी, लेकिन वह जलती नहीं थी। तभी आकाशवाणी हुई:

रामसेस ने अपने ही बेटे को खोया। रातों-रात उसने आदेश दिया: "जाओ! यहाँ से चले जाओ!"

मिस्र की धरती पर फिरौन रामसेस का शासन था। उसके राज्य में इब्रानी (यहूदी) लोग गुलाम थे। उन पर बोझ ढोने वाले ऊँटों से भी ज्यादा कठोर काम लिया जाता था। उसी समय एक भविष्यवाणी हुई थी—एक इब्रानी बालक मिस्र के सिंहासन को हिला देगा और अपने लोगों को मुक्त कराएगा।

इब्रानी लोग मिस्र से निकल पड़े। वे लाल सागर के किनारे पहुँचे, तभी पीछे से धूल उड़ती दिखी—रामसेस ने अपना फैसला बदल लिया था और अपनी पूरी सेना लेकर आ रहा था। इब्रानी घबरा गए: "मूसा, क्या मरने के लिए ही तू हमें ले आया?"

तब शुरू हुआ विनाश का दौर। मूसा ने अपनी लाठी उठाई—नील नदी का पानी लहू बन गया। मेंढक, जूँ, अंधकार, बालों वाली मक्खियाँ, पशुओं की मृत्यु और फोड़े—एक के बाद एक नौ विपत्तियाँ आईं। पर हर बार रामसेस का दिल पत्थर जैसा कठोर हो जाता। जब दसवीं विपत्ति आई—"प्रथमजात की मृत्यु"—तो उस रात मिस्र के हर घर में, फिरौन के महल से लेकर जेल तक, पहले बेटे की मौत हो गई। इब्रानियों ने अपने दरवाज़ों पर मेम्ने के लहू से चिह्न बना रखा था, इसलिए वे बच गए।